विशेष विषय – सहकारी संघवाद
Page 4 – सुधार एवं भविष्य की दिशा
🔹 1️⃣ वित्तीय सुधार
- राज्यों की राजस्व स्वायत्तता बढ़ाना
- जीएसटी मुआवज़ा तंत्र को स्थिर एवं पारदर्शी बनाना
- वित्त आयोग की सिफारिशों का प्रभावी क्रियान्वयन
ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज असंतुलन को कम करना संघीय संतुलन के लिए आवश्यक है।
🔹 2️⃣ संस्थागत सुदृढ़ीकरण
- अंतर-राज्य परिषद को सक्रिय बनाना
- नीति आयोग की समन्वय भूमिका को मजबूत करना
- राज्यपाल की भूमिका को संवैधानिक मर्यादा में रखना
संस्थागत संवाद से केंद्र-राज्य विश्वास बढ़ता है।
🔹 3️⃣ राजनीतिक सहमति एवं संवाद
सहकारी संघवाद की सफलता राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवाद पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय विकास योजनाओं में राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
🔹 4️⃣ भविष्य की दिशा
- डिजिटल शासन में संयुक्त नीति निर्माण
- आपदा प्रबंधन में समन्वित रणनीति
- प्रतिस्पर्धी एवं सहकारी संघवाद का संतुलन
"टीम इंडिया" की अवधारणा सहकारी संघवाद का आधुनिक स्वरूप है।
निष्कर्ष
सहकारी संघवाद भारत की एकता और विविधता को जोड़ने वाला सेतु है। संवाद, समन्वय और संवैधानिक सम्मान ही इसकी स्थायी सफलता का आधार हैं।
© 2026 Shaktimatha Learning
Special Topic | Cooperative Federalism | Page 4
Special Topic | Cooperative Federalism | Page 4
No comments:
Post a Comment